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कोलकाताक रिषड़ा मे मिथिला नवचेतना समितिक 18हम स्थापना दिवस: डिजिटल युग, AI आ मैथिली साहित्य पर ऐतिहासिक विमर्श

📅 16 अगस्त 2026 ✍ Admin 👁 421
कोलकाताक रिषड़ा मे मिथिला नवचेतना समितिक 18हम स्थापना दिवस: डिजिटल युग, AI आ मैथिली साहित्य पर ऐतिहासिक विमर्श
15 अगस्त 2026 कें रिषड़ा (हुगली) स्थित मिथिला भवन मे मिथिला नवचेतना समितिक १८हम स्थापना दिवस सम्पन्न भेल। एहि अवसर पर स्मारिका विमोचन, कविगोष्ठी संग AI, ChatGPT आ डिजिटल युग मे मैथिली साहित्यक दशा-दिशा पर सारगर्भित विमर्श कएल गेल।
रिषड़ा (हुगली) / कोलकाता: विगत १५ अगस्त २०२६ कें भारतक ८० वाँ स्वतंत्रता दिवस ओ मिथिला नवचेतना समिति, रिषड़ा केर १८हम स्थापना दिवसक सुअवसर पर स्थानीय 'मिथिला भवन' मे 'चेतना-समारोह' केर भव्य आयोजन कएल गेल। ई समारोह स्वतंत्रता दिवसक उल्लासक संग-संग मैथिली भाषा, साहित्य आ आधुनिक तकनीकक समन्वय पर एकटा ऐतिहासिक विमर्शक साक्षी बनल। कार्यक्रमक शुभारंभ राष्ट्रीय ध्वजारोहण (झंडातोलन) सं भेल। एकर उपरांत समितिक वार्षिक आय-व्ययक विवरण प्रस्तुत कएल गेल संगहि आगामी कार्यकाल लेल नव कार्यकारिणिक घोषणा कएल गेल। एहि पावन अवसर पर साहित्यकार डॉ. अनमोल झा द्वारा सम्पादित समितिक 'नवचेतना' स्मारिकाक ११हम अंक केर विधिवत विमोचन कएल गेल। समारोहक सत्र आ वैचारिक विमर्श: • पहिल सत्र (मातृभाषामे प्राथमिक शिक्षा): पहिल सत्रक अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मण झा 'सागर' केलनि। ओ अपन अध्यक्षीय वक्तव्यमे बालकक बौद्धिक विकास लेल प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य रूपेँ मातृभाषा मैथिली माध्यममे देबाक आवश्यकता पर विशेष बल देलनि। 

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 • दोसर सत्र (डिजिटल युग, AI ओ मैथिली साहित्य): 20म शताब्दी जँ औद्योगिक आ संचार क्रांतिक युग छल, तँ 21म शताब्दी भाषा आ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) केर शताब्दी थिक। एहि परिप्रेक्ष्यमे "डिजिटल युग मे भाषा ओ साहित्य: अवसर ओ चुनौती" विषय पर संगोष्ठी आयोजित भेल, जे संभवतः मिथिला-मैथिलीक मंच पर AI (Artificial Intelligence) आ LLM केर संदर्भमे पहिल गंभीर विमर्श छल। एहि सत्रमे वरिष्ठ साहित्यकार श्री गंगा नाथ झा केर अध्यक्षतामे विषय विशेषज्ञ लोकनि अपन आलेख पाठ ओ संभाषण प्रस्तुत केलनि: - डिजिटल तकनीक विशेषज्ञ रोशन चौधरी साहित्यकार लोकनि सं अपन रचनाकेँ व्यापक पाठक वर्ग धरि पहुँचाबय लेल डिजिटल रूपमे प्रकाशित करबाक आह्वान केलनि। - मिथिमीडियाक संस्थापक ओ सम्पादक रूपेश त्योंथ AI केर युगमे मैथिली भाषाक मौलिकता, तथ्यात्मक विश्वसनीयता, नैतिकता, कॉपीराइट आ भाषाई लोकतंत्र पर विस्तार सं अपन विचार रखलनि। संगहि ओ ई चिंता सेहो व्यक्त केलनि जे डिजिटल प्रकाशन सं साहित्यकार लोकनिक आय (monetization) सुरक्षित नहि भऽ पाबि रहल अछि। - भाषाविद संतोष मिश्र सेहो डिजिटल माध्यममे मैथिलीक उपस्थिति आ एकर भाषाई शुद्धताक रक्षार्थ अपन महत्वपूर्ण विचार व्यक्त केलनि। • तेसर सत्र (भव्य कविगोष्ठी): तृतीय सत्रक अध्यक्षता सेहो श्री गंगा नाथ झा केलनि। एहि सत्रमे कोलकाता आ उपनगरीय क्षेत्रक सुपरिचित, प्रतिष्ठित आ समीचीन कवि/कवयित्री लोकनि द्वारा उत्कृष्ट काव्य पाठ कएल गेल, जाहि सं मिथिला भवनक सभागार साहित्यिक रस सं सराबोर भऽ गेल। कार्यक्रमक अंतमे आगंतुक लोकनिक प्रति धन्यवाद ज्ञापन कएल गेल। उपस्थित बुद्धिजीवी लोकनि एहि बात पर सहमति व्यक्त केलनि जे आधुनिक तकनीकक अंगीकार करैत अपन भाषाई अस्मिताक रक्षा करब आइ-काल्हिक समयक सबसँ पैघ आवश्यकता अछि।

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